"दो दो राम"
आज हम बात करेंगे राजनीति और राम के बारे में
आज हम बात करेंगे दोनों राम के बारे में जी हाँ आप सही पढ़ रहे है आज भारत में दो रामवादी लोग मिल जाएंगे ।
आज राम को लोगों ने अपने हिसाब से बाट लिया है
आज भारत में दो तरह के राम मिल जायेंगे :
एक राम जिसको हम लोगों ने पढ़ा है
एक राम जिसको राजनीति ने गढ़ा है
एक राम जिसे हम लोगों ने जाना और सुना है
एक राम जिसे राजनीति ने चुना और बुना है
एक राम जिसे लोगों ने दिलों में बसाया है
एक राम जिसे लोगों ने राजनीति में फसाया है
एक राम जिनमें मर्यादा है
एक राम जो सिर्फ राजनीतिक प्यादा है
एक राम जिनमें त्याग ,शील संकल्प है
एक राम जो वोटबैंक का मात्र विकल्प है
1-मर्यादापुरुषोत्तम श्री राम
2-राजनीतिक श्री राम
मर्यादापुरुषोत्तम श्री राम
मर्यादा पुरुषोत्तम राम जो समस्त जनमानस के है ।
राम जो आस्था के प्रतीक है, उदारता के प्रतीक है, मर्यादा के प्रतीक है, समाजवाद के प्रतीक है और सदैव रहेंगे।
राम जो आज भारतीय आस्था के केंद्रबिंदु है ।
वही राम जिन्होनें मनुष्य को जीने की कला सिखाई ।
वही राम जिनके नाम को आज भी लोग अपने नाम में जोड़ते है।
आज भी गांवों के लोगों के लोगो के नाम में राम जोड़ा जाता है ।
मेरे गांव के 40 फीसदी लोगों के नाम के आगे या पीछे राम जरूर जुड़ा है ।
आज भी लोग जब एक दूसरे से मिलते है तो लोग एक दूसरे को राम राम भैया ,जय सिया राम बोलके अभिवादन करते है पर आज कट्टरपंथी लोगों ने इस राम के अभिवादन में भी जहर भर दिया है ।
लोग अब कतराते है कि कहीं जय श्री राम बोलने पर कट्टरवादी न समझ ले ।
मनुष्य की शुरआत राम से होती है
राम पर खत्म होती है।
अंतिम यात्रा में राम नाम लिया ही जाता है मनुष्यों को ये एहसास कराया जाता है राम ही सत्य है ।
लोग भाव -अभाव ,हर्ष-विषाद में राम को ही याद करते है।
पर अफसोस आज के समय में राम के दिखाए गए रास्ते पर चलने वाले विरले ही मिलेंगे।
राजनीतिक श्री राम
अब हम बात करेंगे राजनीति में राम के बारे में जिस रामरूपी रथ पर चढ़कर बीजेपी आज राजनीति के अपने सर्वोच्च शिखर पर है।
राजनीतिक श्री रामको मानने वालों की संख्या बहुत है जो फ़र्ज़ी राम का चोला पहन के रावण जैसे कुकृत्य करते है।
जय श्री राम के नारे लगाते हुए मॉब-लिचिंग करके राम नाम की पवित्रता को धूमिल करते है।
राम का नाम ले लेकर लोगों को मारते है
शायद इन्हीं जैसे लोगों के लिए लिखा गया है "मुँह में राम बगल में छुरी"।
इनको राम का र भी नही पता होता सर पर भगवा पट्टी बांध के ,गले में भगवा गमछा लपेट के, हाथ में भगवा झंडा लेकर जय श्री राम जय श्री राम चिल्लाते है।
क्या ऐसा करने से रामजी खुश होंगे इन हमारी नई फ़सल, नव युवा को कब समझ आयेगा ।
भक्ति भाव से की जाती है आपके पास तो सिर्फ अभाव ही अभाव ज्ञान का तभी आप राम के नाम पर लोगों को आपस में बाटते है।
अरे भई कब समझ आएगा कि
"राम जोड़ता है तोड़ता नही"
मैं काफी सालों से एक नारा सुन रहा था "रामलला हम आएंगे मंदिर वही बनाएंगे"
अमा यार मतलब दोगलापन की भी हद होती है एक तरह कहते हो कि राम हमारे भगवान है दूसरी तरफ उन्हीं भगवान के भगवान बनते हो ।
अमा पहले निश्चय तो कर लो तुम हो भगवान या वो।
अगर उनको भगवान मानते हो तो तुम काहे चौड़िया रहे हो बे इतना ।
मतलब कि जो राम सबकी पार लगाता है अब तुम उनकी पार लगाओगे ।
तुमने सही से रामायण पढ़ा है कि नही बे।
वो प्रसंग याद आता है जब केवट ने रामजी को नदी पार कराई जब सीता जी जब अंगूठी देने लगी उतराई के रूप में तो केवट ने लेने से मना कर दिया और कहा हम तो स्टाफ के आदमी है आपसे कैसा उतराई जी ।
रामजी ने उत्सुकता से पूछा हम स्टाफ के कैसे ?
केवट ने उत्तर दिया क्यों नही आप भवसागर पार कराते है मैं नदी पार कराता हूँ
जब मैं आपके नैया पे आऊं तो आप मुझे भव सागर पार करा देना आज मैं आपको।
झारखंड में जय श्री राम के नारों के साथ जब तबरेज अंसारी की मॉबलिचिंग की गई थी उस समय लिखा था
फ़र्ज़ी रामवादियो के लिए जो आपको हर गली,नुक्कड़,चौराहे पर मिल जाएंगे।
जो जगत को है तारता उन्हें ही सब तारने चले है
भवसागर पारी 'राम'नाम को भयसागर में डालने चले है
एक वाल्मीकि जिसनें मरा मरा जप राम आराध्य पा लिया
एक है ये लोग जिसने श्री राम श्री राम कर दूसरे की जा लिया ।
रामराज की झूठी कल्पना
क्या मात्र राममंदिर बन जाने भर से रामराज आ जायेगा ?
नही कभी नही
आज असली राम को कौन जानता है जो युवा आज राम के नाम की माला जपते है क्या उनको राम का सही अर्थ भी पता है
या फिर जय श्री राम के नारे लगाने भर से रामराज आएगा।
मुझे आज ये कहने में कोई झिझक नही है रामराज की कल्पना झूठी है
रामराज कभी आ ही नही सकता ।
क्योंकि राजनीतिक लोगों को अच्छे से पता राम भारतीय आस्था के केंद्रबिंदु है आस्था का सहारा लेकर वोट अपने पक्ष में किया जा सकता है
इसीलिए उन्होंने लोगों को रामराज की घुट्टी पिलाना शुरू किया।
क्योंकि आप वाकई राम को मानते हो तो उनके दिखाए रास्तों पर चलो।
रामजी ने तो शबरी के झूठे बेर खाये थे आप लोग सिर्फ दिखावे के लिए दलितों के घर खाना खाते है
कहने को तो खाते है पर असल में पीछे क्या खेल रहता है वो समाज को अच्छे से पता है
पहले राम की मानना शुरू तो करो फिर रामराज लाना वोटीवहशियो ।
आज राम को मानने वाले बहुत है पर राम की मानने वाले कहीं दिखाई नही देते ।
आज मै राम की इतनी बात कर रहा हूँ पहले मैं भी फर्ज़ी रामवादी हुआ करता था क्योंकि मुझे याद है आज से 3 साल पहले मैं लखनऊ हॉस्टल में था।
2017 विधानसभा चुनाव का समय चल रहा था 2,4 लड़के आपस मे ही राजनीतिक चर्चा कर रहे थे उसमें मैं भी शामिल हो था ।
मेरे साथ मेरा एक मुस्लिम दोस्त राघिब हुसैन था जो किसी दूसरी पार्टी को पक्षकार था कुछ ऐसी बात हुई कि मैं उसे चिढ़ाने के लिए उग्र होकर बेड पर चढ़कर "जय श्री राम" के नारे लगाने लगा ।
जैसे मैं शांत हुआ उसका जो जवाब आया उसने मेरी सोच को बदल दिया उसने कहा किस राम की बात कर रहे हो तुम लो मैं भी जय श्री राम बोलता हूं।
तुम राम के नाम पर मुझे उकसाने की कोशिश कर रहे हो
जिन रामजी को देख कर मैं बचपन में टीवी पर देखकर बड़ा हुआ हूँ जिसका एक पार्ट भी मिस नही किया है
जिस राम को मैंने बचपन मे टीवी पर हाथ जोड़कर पूरे समय देखा है
यही नही उसने कहा कि अब्बा सऊदी में रहते थे तो इनकम घर की सही थी उस समय गांव में 2,4 घरों में ही टीवी था मेरे घर भी था तो रामायण को देखने के लिए मेरे घर पे लोग इकट्ठा होकर देखते थे मेरी मम्मी भी उनलोगों के बीच मुझे हाथ जोड़ के बिठा देती थी ।
आज तुम उनका नाम लेकर मुझे चिढ़ाने की कोशिश कर रहे हो ।
उसका जबाव सुनकर सच में मुझसे एक शब्द भी बोला न गया मेरी आदत है राजनीतिक मुद्दों की हर बात पर खुद की ही बात को तोड़ मरोड़ के सही साबित करने की पर उस समय मुझसे उत्तर दिया ही नही गया
मैं स्तब्ध रह गया उसकी बात सुनके ।
फ़र्ज़ी रामवादिता का अंत कब?
2019 में सुप्रीमकोर्ट के फ़ैसले के बाद राममंदिर का मुद्दा सुलझ गया ।
"रामलला" टेंट से मुक्त हो गये है राजनीति भी इसके बाद राम के नामपर राजनीति से मुक्त हो गयी है।
हा पर ये तो जगज़ाहिर है अब बीजेपी इस मुद्दे को अपनी बड़ी जीत बता के जरूर आगे भी वोट मांगती रहेगी अपनी वाहवाही करती रहेगी पर बड़ा सवाल ये है कि इन पिछले 3 दशक से राम के नाम पर जो कट्टरवाद, उग्रवाद की जो फसल उगी है क्या उसका भी अंत हो गया है ।
जो आज नये युवा भगवा गमछा लपेट कर जिस उग्रता के साथ कट्टरता के साथ जय श्री राम के नाम पर नारे लगाते है क्या वो सही है
मैं ये नही कह रहा हूँ कि जय श्री राम बोलना ग़लत है पर जय श्री राम के नाम गुंडागर्दी क्या ये सही है ।
क्या अन्य धर्मों के लोगों से बलपूर्वक जय श्री राम के नारे लगवाने वाले भी खत्म हो जाएंगे
क्या फ़र्ज़ी रामभक्ति का भी अंत हो जाएगा ।
राजनीति में राम का उदय
आमतौर पे सभी राजनीतिक पार्टियां सत्ता हासिल करने के लिए साम दाम दंड भेद हर तरीके अपनाती है।
भारतीय जनता पार्टी ,जनसंघ और विश्वहिंदू परिषद ने भी वही काम किया भारतीय राजनीति में एक पहचान बनाने के लिए "राम" नाम,हिंदुत्व का सहारा लिया।
हिन्दू - मुस्लिम करके, हिंदुत्व का एजेंडा अपना के ,राम के नाम पर लोगों को भड़का के,लोगों को आपस मे बाट के किया।
जनतापार्टी के विघटन के बाद 1980 में अटलबिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी,विजयाराजे सिंधिया ,मुरलीमनोहर जोशी जैसे बड़े नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी की नींव रखी ।
इसके पहले अध्यक्ष अटलबिहारी वाजपेयी चुने गए उस समय उनका सपना था समाजवाद ,गांधीवाद के मार्ग को चुनकर सत्ता पे काबिज होने का ।
पर बीजेपी के एक धड़े का झुकाव शुरआत से ही "राम मंदिर" पर था ।
1984 के लोकसभा चुनावों में 2 सीटों पर सिमटने के बाद बीजेपी को भारतीय राजनीति में धुरी बनने के लिए 2सरे मार्ग को अपनाने के लिए विवश होना पड़ा ।
1986 में कट्टरवादी छवि वाले नेता लालकृष्ण आडवाणी ने बीजेपी के अध्यक्ष पद को संभाला और हिंदुत्व और "राम"नाम का मार्ग चुना ।
जो बीजेपी के लिए मील का पत्थर साबित हुआ और 1991 के लोकसभा चुनाव में (1984) 2 सीटों वाली पार्टी देश की 2 नम्बर पार्टी बन गयी ।
इस बात से कोई इनकार नही कर सकता "राममंदिर" "हिंदुत्व" मुद्दे को सीढ़ी बना के बीजेपी सत्ता के सर्वोच्च शिखर पर काबिज है ।
बीजेपी के हर घोषणापत्र में राममंदिर प्रमुख मुद्दा रहा और उनका अब ये सपना साकार हो गया यूँ कहो सबका 5 अगस्त को भूमि पूजन के साथ सभी रामभक्तों का सपना पूरा हुआ।
हर कोई चाहता था इस मुद्दे का अंत हो अंततः सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद इसका अंत भी हुआ ।
सभी पढ़ने वालों से मेरी यही गुजारिश है आप सब राम को मानने के साथ राम की भी मानिये ।
इसमें ही सभी का हित है सबको साथ लेकर चलिये ।
रजत कनौजिया
🙏🙏जय सिया राम🙏🙏
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